कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाया गांधी व शास्त्री की जयंती

Contentshide1 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती कांग्रेस कार्यालय मे मनाया गया2 गांधी जी भी महामारी की चपेट में आए थे,3 कब-कब महामारी के चपेट में आए4 महात्मा गांधी की 151वीं जयंती समारोह में ये रहे मौजूद

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती कांग्रेस कार्यालय मे मनाया गया

-कांग्रेस कार्यालय जसनगर रोड पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया।

फास्ट न्यूज़: रियां बड़ी- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की

जयंती जिला कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष कालू खां की अगुवाई में समारोह पूर्वक मनाई गई।

जिसमे सरकार की गाइडलाइन का पूरा ध्यान रखा गया राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं

जयंती समारोह के अवसर पर स्थानीय कांग्रेस कार्यालय जसनगर रोड पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया।

साथ ही उनके बताए सत्य और अहिसा के मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ

लोगों को भी इसी रास्ते पर चलने का आवाहन किया गया। लोगों के अंदर विद्वेष की भावना बढ़ रही है।

पढ़े, लिखे लोग भी ऐसी हरकत कर जाते हैं जो समझ से पड़े है। पू

र्व ब्लाक अध्यक्ष माणकचंद जी पाराशर ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए रास्तों पर आज देश ही नहीं बल्कि विश्व भी चल रहा है।

गांधी कहते थे, राजनीती के बिना धर्म के नहीं हो सकती महात्मा गांधी व्यक्ति नहीं संस्था थे, वे जितना सहज दिखते हे उतना ही वे कठिन हैं.

उनका क्षितिज व्यापक हैं एक आम आदमी से महान आदमी के बीच अपने कार्यो, विचारों व दर्शन से एक संबंध स्थापित किया।

गांधी जी भी महामारी की चपेट में आए थे,

नई पीढ़ी पहली बार महामारी के बीच गांधी जी का जन्मदिन मना रही है,

जबकि खुद गांधी जी स्पेनिश फ्लू महामारी के दौर से गुजर चुके हैं।

इतना ही नहीं 1918 से लेकर 1920 तक चली इस महामारी का शिकार महात्मा गांधी भी हुए थे।

कई किताबों में इस बात का जिक्र मिलता है। अपने जीवन में कई बार गंभीर बीमारियों की चपेट में आने के बाद भी गांधी जी ने अनुशासन के बल पर स्वस्थ्य होकर दिखाया है।

कब-कब महामारी के चपेट में आए

इंडियन मेडिकल जर्नल के मुताबिक, वे अपने जीवन में फिजिकल फिटनेस और संतुलित आहार को बहुत जरूरी मानते

थे। गांधी जी 1914 में प्लूरिसी, 1918 में स्पेनिश फ्लू, 1929 में गंभीर डिसेंट्री,

1925,1936 और 1944 में मलेरिया, 1939 में गैस्ट्रिक फ्लू और 1945 में इन्फ्लूएंजा की चपेट में आ गए थे।

हालाँकि कोरोनावायरस दुनियाभर में फैल चुका है और वैज्ञानिक इससे बचने के लिए वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं।

हालांकि, अभी यह पता नहीं है कि वैक्सीन हमें कब तक मिल पाएगी। हाल ही में खबरें आईं थीं कि वैक्सीन ट्रायल में रुकावटें आ गई हैं।

ऐसे वक्त में हमें गांधी जी की बातों को याद करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा था कि ‘हम ठोकर खा सकते हैं, गिर सकते हैं, लेकिन फिर उठेंगे।

यह काफी होना चाहिए कि हम मैदान छोड़कर भागे नहीं।’ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कुछ ऐसी ही बातें कोरोना के दौर में हमें सुरक्षित रहने की सीख देती हैं।

महात्मा गांधी की 151वीं जयंती समारोह में ये रहे मौजूद

इस मोके पर ओ.बी.सी जिलाध्यक्ष भरत कुमार सैनी, जिला सचिव राम किशोर तिवाड़ी, रामनिवास भाटी,

बरकत अली, पूर्व प्रधान राजु राम, जिला उपाध्यक्ष सत्तार चौहान, सुखदेव भाटी, दयाशंकर,

रशीद भाई तेली, पूर्व सरपंच संपत राज भाटी, रफीक ठेकेदार, शाकिर मोहम्मद,

पूर्व उप सरपंच उम्मेद सिंह सहित सभी कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। फोटो 01 रियांबड़ी, कांग्रेस कार्यकर्ता बनाते गांधी व शास्त्री की जयंती ।

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